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Avneet Kaur Sex Story in Hindi Part 2 – Avneet Lost it

(भाग-1 का छोटा रिफ्रेशर: वो मासूम बच्ची जो कभी “बंटी तेरा साबुन स्लो है क्या” बोलती थी, अब 2025 में 24 साल की हो चुकी है। सिलिकॉन, हार्मोन इंजेक्शन, प्रोड्यूसर्स-डायरेक्टर्स के बिस्तर… सब कुछ करके वो टॉप पर पहुँच गई थी। लेकिन कीमत भी चुकानी पड़ी – कोकीन, MDMA, नींद की गोलियाँ और सेक्स की लत। अब उसका बदन तो हीरोइन का है, पर दिमाग एक 24×7 चलने वाली रंडी का। भाग-1 में हमने देखा था कि कैसे वो राजीव खन्ना, स्पॉट बॉयज़ और भिखारियों तक के साथ खुद को लुटा चुकी है। अब कहानी आगे बढ़ती है…)

2025 का नवंबर।
अवनीत कौर की फिल्म “Love in Vietnam” सुपरहिट चल रही है। बाहर से सब कुछ परफेक्ट लगता है – 35 मिलियन इंस्टा फॉलोअर्स, रेड कार्पेट, लग्जरी लाइफ। लेकिन सच ये है कि पिछले दो साल से वो एक दिन भी बिना चुदे नहीं सोई। उसकी चूत और गांड में हमेशा जलन रहती है। नींद की गोलियाँ लेने के बाद भी आँखें खुलती हैं तो सबसे पहले हाथ चूत पर जाता है।

1. सुबह 6:30 बजे – दूधवाला रामू

अवनीत ने दरवाज़ा सिर्फ़ एक पतली सी ट्रांसपेरेंट नाइटी में खोला। अंदर कुछ नहीं। निप्पल्स साफ दिख रहे थे।
रामू ने जैसे ही दूध की बोतल आगे बढ़ाई, अवनीत ने उसका हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया।
“आज दूध किचन में नहीं, मेरी चूत में डालना है।”

उसने रामू को सोफ़े पर धकेला, उसकी लुंगी ऊपर की और मुँह में ले लिया। दस सेकंड में ही रामू का काला, बदबूदार लंड पूरा खड़ा। अवनीत ऊपर चढ़ गई – रिवर्स काउगर्ल। खुद ही लंड पकड़कर चूत पर रखा और एक झटके में बैठ गई।
“आआह्ह्ह… माँ कसम… फाड़ दिया तूने!” अवनीत चीखी, पर कमर तेज़ी से ऊपर-नीचे करने लगी।
रामू ने नीचे से दोनों स्तन पकड़कर मसलने शुरू कर दिए। निप्पल्स को इतना मरोड़ा कि लाल हो गए।
पंद्रह मिनट तक सोफ़ा हिलता रहा। अवनीत की चीखें – “जोर से… और जोर से… मेरी कोख में अपना माल भर दे!”
आखिर में रामू ने कमर ऊपर उठाकर दस ज़ोर के धक्के मारे और अवनीत की चूत के सबसे अंदर अपना गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। अवनीत का बदन काँप उठा, वो भी झड़ गई। दोनों पसीने से तर।
रामू गया तो अवनीत सोफ़े पर ही लेटी रही, चूत से वीर्य टपकता हुआ। उंगली डालकर चाटा और मुस्कुराई – “सुबह का नाश्ता हो गया।”

2. दोपहर 2 बजे – शूटिंग सेट पर स्पॉट बॉयज़

लंच ब्रेक। अवनीत ने सात स्पॉट बॉयज़ को मैसेज किया – “स्टोर रूम, अभी।”
सब पहुँचे। दरवाज़ा अंदर से बंद।
अवनीत ने एक झटके में अपनी शॉर्ट ड्रेस उतार दी। सिर्फ़ हाई हील्स पहनी रहीं।
“बीस मिनट हैं। जो करना है करो, बस कंडोम मत लगाना।”

पहले दो ने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया – एक ने आगे से चूत में, एक ने पीछे से गांड में। बाकी पाँच लाइन में।
अवनीत की चीखें – “हाँ… दोनों एक साथ… फाड़ दो मुझे… आह्ह्ह्ह…”
फिर उसे हवा में उठाया। एक नीचे लेटा, अवनीत उसकी ऊपर। दूसरा पीछे से गांड में। तीसरा मुँह में। बाकी चार उसके हाथों में लंड थमाए, स्तनों को मसल रहे थे।
कमरे में सिर्फ़ थप-थप-थप… चप-चप… ग्लक-ग्लक की आवाज़ें।
अवनीत की आँखें लाल, मुँह से लार टपक रही थी। वो खुद चिल्ला रही थी – “सब अंदर झाड़ो… मुझे प्रेग्नेंट कर दो… मैं तुम सबकी रखैल हूँ…”
बीस मिनट में सातों ने बारी-बारी से चूत, गांड और मुँह में झाड़ा। आखिर में सबने उसके चेहरे, बालों, स्तनों पर बकी बाकी माल उड़ेल दिया। अवनीत फर्श पर नंगी लेटी थी – पूरी तरह वीर्य से लथपथ।
एक स्पॉट ने वीडियो बनाया। अवनीत ने मुस्कुराकर कहा – “इंस्टा पर मत डालना, मेरे प्राइवेट फोल्डर में डाल देना। रात को देखकर फिर झड़ूंगी।”

3. रात 11 बजे – बांद्रा का अंडरग्राउंड बार

अवनीत अकेली गई। माइक्रो ब्लैक ड्रेस, नीचे कुछ नहीं। बार काउंटर पर बैठी और जान-बूझकर पैर फैलाए। दस मिनट में ही पंद्रह-बीस लोग उसके आसपास।
एक ने सीधे उंगली डाल दी। दूसरा स्तन बाहर निकालकर चूसने लगा।
फिर उसे मेन्स टॉयलेट में ले गए। दरवाज़ा खुला छोड़ा।
लाइन लग गई। कोई कंडोम नहीं।
सबने बारी-बारी से चोदा – कोई चूत में, कोई गांड में, कोई मुँह में। अवनीत चिल्ला रही थी – “हाँ… सब मिलकर चोदो… मुझे भर दो… मैं रंडी हूँ तुम सबकी…”
चालीस मिनट बाद जब बार बंद हुआ तो अवनीत टॉयलेट के फर्श पर नंगी लेटी थी – चूत और गांड से वीर्य की नदी बह रही थी।

4. रात 2 बजे – भिखारियों का गैंगबैंग

बार से निकलकर भी उसकी भूख नहीं मिटी।
सड़क पर पाँच भिखारी सो रहे थे। अवनीत उनके पास गई, खुद कपड़े उतारे और बोली – “चलो मेरे साथ, मुझे चोदो।”
एक गंदी, बदबूदार गली में ले गए।
अवनीत को ज़मीन पर लिटाया। एक ने मुँह में, दो ने चूत और गांड में, बाकी दो स्तनों के बीच।
गंदे, बदबूदार लंड। अवनीत पागल हो चुकी थी – “हाँ… और गंदा करो… मुझे कीचड़ में लपेट दो… आह्ह्ह्ह…”
पैंतालीस मिनट तक चला। सबने चार-चार बार झाड़ा। आखिर में सबने उसके चेहरे, बालों, पूरे बदन पर बकी बाकी वीर्य उड़ेल दिया। अवनीत ज़मीन पर पड़ी रही – नंगी, वीर्य से लथपथ, आँखें बंद, होंठों पर मुस्कान।

5. सुबह 5 बजे – मेड रानी के साथ बाथरूम

रानी उसे ढूँढते हुए उसी गली में पहुँची। अवनीत की हालत देखकर रोने लगी, लेकिन अवनीत ने कमजोर आवाज़ में कहा – “घर ले चल… और चोदना मत भूलना।”

घर पहुँचकर रानी ने उसे बाथरूम में ले गई। गर्म पानी का शावर चालू किया।
अवनीत की आँख खुली। जैसे ही रानी ने उसका बदन छुआ, उसकी भूख फिर जाग गई।
“रानी… आज मुझे मार डाल… पूरी तरह…”

रानी ने साड़ी उतारी। दोनों नंगी।
रानी ने अवनीत को दीवार से सटाया। पहले दोनों स्तनों को इतना ज़ोर से चूसा कि निशान पड़ गए। फिर घुटनों पर बैठकर चूत चाटी – जीभ सबसे अंदर तक। अवनीत की टाँगें काँपने लगीं – “हाँ रानी… और अंदर… मेरी आत्मा चाट ले…”
रानी ने पाँच उंगलियाँ एक साथ चूत में ठोंक दीं – तेज़ी से पंपिंग। अवनीत चीखी – “फाड़ दे… आज मेरी चूत फाड़ दे!”
फिर रानी ने 12 इंच का मोटा स्ट्रैप-ऑन बाँधा। अवनीत को झुकाया – पहले चूत में पूरा पेला, फिर गांड में। पानी और साबुन की फिसलन में लंड ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर।
अवनीत की चीखें बाथरूम की दीवारों से टकरा रही थीं – “हाय माँ… मैं मर रही हूँ… और तेज़… आज मुझे खत्म कर दे!”
दोनों का क्लाइमैक्स एक साथ आया। अवनीत का पूरा बदन काँप उठा, फर्श पर उसका रस और पानी मिलकर बहने लगा।

रानी ने उसे गोद में उठाकर बेड पर लिटाया।
अवनीत की आँखें बंद थीं, होंठों पर हल्की सी मुस्कान।
उसने फुसफुसाया –
“कल फिर… और ज़्यादा लोग… और गंदा… और ज़्यादा दर्द…”

क्योंकि अब अवनीत कौर सिर्फ़ एक नाम नहीं थी।
वो एक कभी न रुकने वाला, कभी न संतुष्ट होने वाला, सेक्स का भयानक तूफ़ान थी।
और ये तूफ़ान अब सिर्फ़ बढ़ता ही जा रहा था।

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