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Muslim Kiryedar Part 1 – Beti ki chudayi

मेरा नाम आरव है। मैं एक दो मंजिला मकान का मालिक हूँ। ऊपर वाली मंजिल पर एक मुस्लिम फैमिली किराए पर रहती है – अब्बू गुजर चुके हैं, अम्मी शबाना (38 साल की गजब की हॉट औरत, मोटे-मोटे मम्मे, चौड़ी गांड, हमेशा दुपट्टा लपेटकर भी सेक्सी लगती) और तीन बच्चे। सबसे बड़ी बेटी मुस्कान – 19 साल की जवान, दूध जैसी गोरी स्किन, काली-काली बड़ी-बड़ी आँखें, 36-28-38 का कातिल फिगर। वो हमेशा टाइट कुर्ती और सलवार में घूमती, जिससे उसके भारी-भारी बूब्स हर कदम पर उछलते और गोल-गोल मादर्चोद गांड लहराती। शुरू में मैं उसे अपनी छोटी बहन ही मानता था – प्यारी, मासूम सी। लेकिन अंदर से मेरा लंड हमेशा उसे देखकर सलाम ठोकता।

फिर एक दिन मैं किराया लेने ऊपर गया। मुस्कान किचन में बर्तन धो रही थी। झुकते ही उसकी कुर्ती का गला नीचे लटक गया और उसके रसीले, गोल-गोले मम्मे गुलाबी ब्रा में कैद होकर भी आधे से ज्यादा बाहर झांकने लगे। गुलाबी निप्पल्स साफ दिख रहे थे – सख्त, चुचुकदार। मेरी नजर वहाँ अटक गई। मेरा 8 इंच का मोटा लौड़ा तुरंत खड़ा होकर पैंट फाड़ने लगा। सांस तेज हो गई, मुंह में पानी भर आया। उस दिन से दिमाग में बस एक ही ख्याल – इस गंदी मुस्लिम रंडी को किसी भी तरह नंगा करके चोदना है, इसका रस पीना है, इसे अपनी गुलाम बनाना है।

उसके बाद मैं हर मौका ढूंढने लगा – जैसे भूखा शेर शिकार को घूरता है।

  • कभी बच्चे खेलते तो “गलती से” उसके मम्मे दबा देता – इतना जोर से कि वो सिहर जाती, लेकिन मुस्कुराकर आँखें नीची कर लेती।
  • सीढ़ी चढ़ते वक्त पीछे से उसकी गांड पर हाथ फेरता, उंगलियाँ गांड की दरार में दबाता।
  • बहाना बनाकर कमर में हाथ डालकर खींचता, लंड उसकी पीठ पर टिका देता।

वो हर बार शरमाती, लाल हो जाती, होंठ काटती, लेकिन कभी चिल्लाई नहीं। मुझे लगता था – ये साली भी मन ही मन तैयार हो रही है, चूत में खुजली हो रही है मेरे लंड की।

फिर एक दिन मैंने हद कर दी। वो छत पर कपड़े सुखा रही थी। हवा में उसके बूब्स हिल रहे थे। मैं चुपके से पीछे लपका, दोनों हाथों से उसके भारी मम्मे पकड़ लिए – इतना जोर से मसला कि वो चिहुंक गई। मेरा खड़ा लौड़ा उसकी गांड पर टिका कर कान में फुसफुसाया, “मुस्कान, तेरे ये मादर्चोद बूब्स मुझे पागल कर देते हैं। रोज मुठ मारता हूँ तेरी सोचकर।” वो चौंकी, जोर से मुझे धक्का दिया और घूरती हुई भाग गई। उस दिन से वो मुझसे बचने लगी – नजरें नहीं मिलाती, बात नहीं करती। मेरे अंदर गुस्सा और वासना दोनों उफान पर पहुँच गए। अब मैंने ठान लिया – जबरदस्ती ही सही, इस रंडी को अपनी गुलाम बनाकर रोज चोदूंगा। रात को उसकी फोटो देखकर रोज तीन-तीन बार मुठ मारता, सोचता – इसका मुंह चोदूंगा, गला फाड़ दूंगा, चूत-गांड दोनों फाड़कर माल भर दूंगा।

फिर वो सुनहरा मौका आया। एक शाम अचानक उसके फ्लैट की लाइट चली गई। पूरा घर अंधेरा। फ्यूज ऊंचाई पर था, मुस्कान की पहुंच से बाहर। उसने डरते हुए मुझे आवाज दी, “करण भाईया… जरा फ्यूज देख दीजिए ना… अंधेरा हो गया…” उसकी आवाज में कांप थी, लेकिन मुझे पता था – आज इसकी सील टूटेगी।

मैं ऊपर गया। वो स्टूल पर चढ़ी थी, हाथ ऊपर उठाए – कुर्ती पेट तक ऊपर चली गई थी। पतली कमर, गहरी नाभि, और सलवार में फूली हुई गांड। मैं उसके ठीक पीछे खड़ा हो गया। मेरा लंड पहले से पत्थर जैसा खड़ा था। मैंने एकदम से आगे बढ़कर अपना 8 इंच का गरम, नसों वाला लौड़ा उसकी गांड के बीच में सटा दिया – इतना जोर से कि वो स्टूल समेत हिल गई। एक हाथ उसकी नंगी कमर पर फेरते हुए, होंठ उसकी गर्दन पर टिका दिए। मेरी गरम सांसें उसकी गर्दन पर पड़ रही थीं। वो चौंकी, “करण भाईया… ये क्या कर रहे हो…?”

मैंने फुसफुसाया, “शशश… बस फ्यूज ठीक कर रहा हूँ, रंडी।” और लंड को ऊपर-नीचे रगड़ने लगा – सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड चोदने लगा। मेरा सुपारा उसकी गांड की दरार में घुस रहा था। वो छटपटाने लगी, “भाईया प्लीज… छोड़ दो… अम्मी घर पर है…”

मैंने दांतों से उसकी कान की लौ काटी और गर्जा, “अम्मी सो रही है, साली। और सोते रहने दे, वरना उसे भी बुला लेंगे। माँ-बेटी दोनों को एक साथ चोदूंगा।” ये सुनकर उसका शरीर एकदम कांप गया, लेकिन उसकी गांड पीछे की तरफ धक्का मारने लगी – जैसे मेरा लंड मांग रही हो। मुझे पता चला – ये रंडी भी पूरी गर्म हो चुकी है।

मैंने अपना एक हाथ नीचे सरकाया, सलवार का नाड़ा खींच दिया। वो घबराकर मेरा हाथ पकड़ने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़कर जबरदस्ती अपने लंड पर रख दिया – पैंट के ऊपर से। उसकी नरम उंगलियाँ खुद-ब-खुद मेरे लंड को दबाने लगीं, सहलाने लगीं। “देख रंडी, कितना भूखा है तेरा भाईया… तुझे चोदने के लिए तड़प रहा है।”

फ्यूज ऑन हो गया, लाइट जली। लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं। मैंने उसे पलटा, दीवार से सटा दिया, दोनों हाथ उसके सिर के ऊपर दीवार पर टिका दिए। मेरे होंठ उसके होंठ से बस एक मिलीमीटर दूर। उसकी सांसें तेज, बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। “बोल, मुझे किस करना है क्या?” वो कांप रही थी, आँखों में आंसू और वासना दोनों। “बोल ना गंदी रंडी… किस करूं? बोल कि करन भाईया मुझे चोद लो…”

उसने रोते हुए, कांपती आवाज में कहा, “हाँ… किस कर लो… मुझे चोद लो करन भाईया… मैं आपकी रंडी हूँ…”

मैंने उसके होंठ चूस लिए – जंगली तरीके से, जैसे भूखा शेर। जीभ अंदर घुसेड़ी, उसकी जीभ को चूस रहा था, लार पी रहा था। एक हाथ कुर्ती के अंदर, ब्रा ऊपर सरका कर नंगे मम्मे मसलने लगा। निप्पल्स पत्थर जैसे खड़े थे – मैं उन्हें मरोड़ रहा था। वो मेरे मुंह में सिसकारियां ले रही थी, “आआह… करन भाईया… धीरे… दुख रहा है… आआआह्ह्ह… पर मत रुको… और जोर से मसलो मेरे बूब्स… मैं आपकी सस्ती रंडी हूँ…”

मैंने उसे घुटनों पर बिठाया। पैंट खोली, 8 इंच का मोटा, नसदार लौड़ा उसके मुंह के सामने लहराया। टॉप पर पानी चमक रहा था। “ले रंडी, चूस मेरा लंड। दिखा कितनी गंदी मुस्लिम छिनाल है तू।” वो पहले शरमाई, फिर आँखों में वासना भरकर मुंह खोलकर अंदर ले लिया। गजब की चूसक थी – गला तक लेती, जीभ से चाटती, गोली मुंह में लेकर चूसती। “ग्लक-ग्लक… स्लर्प… आआह्ह्ह करन भाईया… आपका लंड बहुत स्वादिष्ट है… और गंदा करो मुझे…” मैं उसके बाल पकड़कर मुंह चोदने लगा – जोर-जोर से धक्के, उसका गला फूल रहा था। “हाँ मुस्कान… ऐसे ही… तू तो पैदाइशी ककड़ी चूसक रंडी है… तेरी अम्मी ने अच्छा सिखाया है क्या? बोल ना साली, कितने लंड चूसे हैं तूने?” वो गला दबाते हुए भी मिमियाई, “आआह्ह्ह… सिर्फ आपका… बस आपका… मुझे अपनी रखैल बना लो…”

फिर मैंने उसे किचन स्लैब पर लिटाया। सलवार-पैंटी एक साथ नीचे उतारी। उसकी चूत बिल्कुल गुलाबी, क्लीन शेव्ड, पानी से लबालब – रस टपक रहा था। मैंने घुटने टेककर उसकी चूत पर मुंह रखा – जीभ अंदर घुसेड़ी, चूत का रस पीने लगा। वो पागल हो गई, कमर उछालने लगी। “आआआह्ह्ह्ह करन भाईया… चूसो मेरी चूत… आआह्ह्ह… मैं मर जाऊंगी… और गंदा करो मुझे…” मैंने उसकी क्लिट काटी, दो उंगलियाँ चूत में घुसेड़कर चोदने लगा। वो चिल्लाने लगी, “आआआह्ह्ह… फाड़ दो… मैं आपकी गुलाम हूँ… रोज चोदना मुझे…”

मैं खड़ा हुआ, लंड उसकी चूत पर रगड़ा – ऊपर-नीचे, क्लिट पर सुपारा घुमाई। वो तड़प रही थी, “करण भाईया डाल दो… अब नहीं सहा जाता… फाड़ दो मेरी चूत… मैं आपकी सस्ती रंडी हूँ… प्लीज्ज्ज…” मैंने सिर्फ सुपारा अंदर किया और रुक गया। वो रोने लगी, कमर उछालने लगी, “पूरा डालो ना… प्लीज… मैं मर जाऊंगी… आआह्ह्ह…”

मैंने एक जोर का धक्का मारा – पूरा 8 इंच अंदर। वो चीखी, “आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… फट गयी… मादर्चोद… बहुत मोटा है… आआह्ह्ह पर और जोर से…” फिर मैंने ऐसा चोदा – स्लैब हिल रहा था, चुदाई की चप-चप-फच-फच आवाजें पूरे घर में गूंज रही थीं। उसके मम्मे उछल रहे थे, मैं उन्हें चूसता, काटता, मसलता। गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारता – लाल हो गई। “बोल, किसकी रंडी है तू? बोल गंदी मुस्लिम छिनाल!”

वो चीख-चीख कर बोली, “आपकी… सिर्फ आपकी… आआआह्ह्ह… रोज चोदना मुझे… अम्मी को भी ला दूंगी एक दिन साथ में… हम दोनों को बिस्तर पर नंगा करके रगड़ना… आआह्ह्ह… मैं आपकी गुलाम रंडी हूँ… और तेज चोदो… फाड़ दो मेरी चूत…”

मैंने उसे डॉगी बनाया, बाल पकड़कर गांड चोदी – पहले चूत फिर गांड में उंगली डालकर। वो और पागल हो गई। “आआआह्ह्ह… गांड भी मारो भाईया… मैं सब कुछ देंगी आपकी… बस मुझे अपनी रखैल बना लो…” हम दोनों एक साथ झड़े – मैंने उसकी चूत में गाढ़ा-गाढ़ा माल उड़ेल दिया, इतना कि बाहर बहने लगा। वो बेहोश सी हो गई, शरीर कांप रहा था।

जब होश आया तो वो खुद मेरे लंड को मुंह से साफ करने लगी – एक-एक बूंद चाटकर। आँखों में नई चमक थी – अब वो मेरी गुलाम रंडी बन चुकी थी।

उस दिन के बाद मुस्कान मेरी पर्सनल माल बन गई।

  • सुबह दूध लाने आती तो पैंटी नहीं पहनती, झुककर चूत दिखाती और फुसफुसाती, “करण भाईया, जल्दी से एक शॉट मार दो… चूत गीली है…”
  • रात को मैसेज: “अम्मी सो गई, दरवाजा खुला है, चूत में खुजली हो रही है… आओ मुझे रगड़ दो…”
  • छत पर, किचन में, बाथरूम में, सीढ़ियों पर – जहां मौका मिला, नंगा करके चोदता। कभी मुंह में माल डालता, कभी चूत में, कभी गांड में। वो हर बार और गंदी बनती गई – खुद थप्पड़ मांगती, गाली सुनने की भूखी।

और हाँ… अब उसकी अम्मी शबाना पर नजर है। मुस्कान ने खुद कहा है, “करण भाईया, अम्मी भी बहुत दिनों से नहीं चुद रही। एक दिन उसे भी चोद डालना… मैं साथ दूंगी। माँ-बेटी दोनों को एक बिस्तर पर नंगा करके रगड़ना… हम दोनों आपकी गुलाम रहींगी।” जल्दी ही माँ-बेटी दोनों को एक साथ चोदकर उनका रस निचोड़ने वाला हूँ

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