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Muslim Kiryedar Part 2 – Maa Beti ki chudayi

मेरा नाम करन हैं – खासकर मुस्कान और उसकी अम्मी शबाना, जब मेरे नीचे नंगी होकर तड़पती हैं।

वो दिन आखिरकार आ गया।  

मैंने मुस्कान को पहले ही बोल रखा था – आज अम्मी को तैयार करके लाना, कोई बहाना बनाकर। मुस्कान ने हंसकर कहा था, “भाईया, अम्मी तो पहले से ही गर्म रहती हैं। बस एक बार आपका लंड देख लें, खुद ही घुटनों पर बैठ जाएंगी।”

शाम के सात बजे। मुस्कान का मैसेज आया:  

“आ जाओ करन भाईया… अम्मी को नींद की गोली वाला बहाना बनाकर अपने कमरे में ले आई हूँ। दरवाजा खुला है। हम दोनों नहा कर इंतज़ार कर रही हैं।”

मैं ऊपर गया। दरवाजा हल्का सा खुला था। अंदर से हल्की-हल्की रोज़ की खुशबू और औरतों की गीली चूत की महक आ रही थी। मैंने धीरे से धक्का दिया और अंदर घुस गया।

कमरे में लाइट धीमी थी। डबल बेड पर माँ-बेटी दोनों एक ही सफेद चादर पर नंगी बैठी थीं।  

शबाना (38 साल) – दूधिया गोरी, भारी-भारी 38 साइज़ के बूब्स जो उम्र की वजह से हल्के से लटक रहे थे, गुलाबी निप्पल्स, चौड़ी-चौड़ी गांड, और चूत पर हल्के-हल्के बाल।  

मुस्कान उसके बगल में – जवान, टाइट बूब्स, पिंक निप्पल्स, चूत एकदम क्लीन शेव्ड।  

दोनों की आँखों में वासना और डर का मिश्रण।

मुस्कान ने मुस्कुराकर कहा, “देखो अम्मी, मैंने कहा था ना… करन भाईया का लंड देखोगी तो पागल हो जाओगी।”

शबाना शरमाकर आँखें नीची कर लीं, लेकिन उसकी सांसें तेज़ थीं। मैंने धीरे-धीरे कपड़े उतारे। जैसे ही मेरा 8 इंच का मोटा, नसदार लौड़ा बाहर आया, दोनों की आँखें उस पर टिक गईं।  

शबाना के मुंह से अपने आप निकला, “हाय अल्लाह… इतना मोटा… ये तो मेरी चूत फाड़ देगा…”

मैं बेड पर चढ़ गया। पहले मुस्कान को खींचकर अपने पास लिया और शबाना को सामने बिठा दिया।  

“देख अम्मी, आज तेरी बेटी को चोदते हुए देख… फिर तेरी बारी।”

मैंने मुस्कान को किस करना शुरू किया – गहरा, जंगली किस। उसकी जीभ चूस रहा था। एक हाथ उसके बूब्स मसल रहा था, दूसरा उसकी चूत में उंगली डालकर चोद रहा था।  

मुस्कान चिल्ला रही थी, “आआआह्ह्ह करन भाईया… देखो अम्मी… कैसे मसल रहे हैं मेरे बूब्स… आआह्ह्ह… मैं आपकी रंडी हूँ…”

शबाना देखते-देखते खुद ही अपने निप्पल्स मसलने लगी। उसकी चूत से रस टपक रहा था।  

मैंने मुस्कान को घुटनों पर बिठाया और लंड उसके मुंह में ठूंस दिया।  

“चूस रंडी… अपनी अम्मी को दिखा कि तू कितनी अच्छी चूसक है।”

मुस्कान ने गला तक ले लिया – ग्लक-ग्लक… स्लर्प-स्लर्प… लार टपक रही थी।  

शबाना की आँखें फैली हुई थीं। मैंने इशारा किया। वो खुद आगे आई और बेटी के बगल में घुटने टेक दिए।  

“अब तेरी बारी रंडी… चूस मेरे लंड को अपनी बेटी के साथ।”

शबाना ने डरते-डरते लंड पकड़ा, जीभ से चाटा… फिर मुंह में लिया।  

माँ-बेटी दोनों एक ही लंड चूस रही थीं – एक गोली चूसती, दूसरी छाती, कभी जीभ से आपस में लड़तीं।  

मैं दोनों के बाल पकड़कर बारी-बारी मुंह चोद रहा था।  

“हाँ रंडियो… चूसो… तुम दोनों मेरी गुलाम हो… बोलो!”

दोनों एक साथ बोलीं, “हाँ मालिक… हम आपकी गुलाम रंडी हैं… हमें रोज चोदना…”

फिर मैंने शबाना को लिटाया। उसकी टांगें चौड़ी कीं। उसकी चूत पूरी गीली थी, रस बह रहा था।  

मैंने मुस्कान से कहा, “तेरी अम्मी की चूत चाट, तैयार कर।”

मुस्कान ने माँ की चूत पर मुंह रख दिया – जीभ अंदर, क्लिट चूस रही थी।  

शबाना पागल हो गई, “हाय अल्लाह… मुस्कान… आआआह्ह्ह… बेटी… और चूस… आआह्ह्ह… करन जी… जल्दी डालो… मैं मर जाऊंगी…”

मैंने मुस्कान को हटाया और अपना लंड शबाना की चूत पर रगड़ा।  

“बोल रंडी… किसकी है तू?”  

शबाना चीखी, “आपकी… सिर्फ आपकी… फाड़ दो मेरी चूत… सालों से नहीं चुदा है कोई…”

मैंने एक जोर का धक्का मारा – पूरा लंड अंदर।  

शबाना की चीख पूरे कमरे में गूंजी, “आआआआह्ह्ह्ह्ह मादर्चोद… फट गयी… बहुत मोटा है… आआह्ह्ह पर और जोर से…”

मैंने शबाना को चोदना शुरू किया – जोर-जोर से धक्के। बेड हिल रहा था। उसके भारी बूब्स उछल रहे थे।  

मुस्कान बगल में बैठकर अपनी चूत सहला रही थी और माँ के निप्पल्स चूस रही थी।  

फिर मैंने मुस्कान को भी ऊपर चढ़ाया – 69 पोजीशन में। मुस्कान मेरे मुंह पर चूत रखकर झुक गई और माँ की चूत चाटने लगी, जबकि मैं शबाना को चोद रहा था।  

कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाजें – चप-चप-फच-फच… और तीनों की सिसकारियाँ।

फिर मैंने दोनों को डॉगी बनाया – माँ-बेटी की गांड एक के ऊपर एक।  

पहले शबाना की चूत में लंड डाला, दस-पंद्रह धक्के… फिर निकालकर मुस्कान की गांड में।  

दोनों चीख रही थीं, “आआआह्ह्ह… और तेज… हम आपकी रंडी हैं… फाड़ दो हमारी चूत-गांड…”

मैं बारी-बारी चोद रहा था। कभी माँ की गांड पर थप्पड़, कभी बेटी के बूब्स मरोड़ता।  

आखिर में मैंने दोनों को घुटनों पर बिठाया। लंड हिलाया और दोनों के मुंह-चेहरा-बूब्स पर गरम-गरम गाढ़ा माल उड़ेल दिया।  

दोनों आपस में चाट-चाटकर साफ करने लगीं – माँ बेटी के बूब्स चाट रही थी, बेटी माँ के होंठ।

झड़ने के बाद दोनों मेरे पैरों पर गिर पड़ीं।  

शबाना रोते हुए बोली, “करण जी… अब से हम दोनों आपकी गुलाम हैं। जब मन करे, बुला लेना। चूत हो, गांड हो, मुंह हो – सब आपका।”

मुस्कान हंसकर बोली, “अब तो घर में तीन मंजिल हो गई – नीचे आप, बीच में आपका लंड, ऊपर हम दोनों की चूत-गांड।”

अब रात-दिन माँ-बेटी की चुदाई चलती है। कभी अलग-अलग, कभी साथ-साथ।  

और हाँ… अगला प्लान है – शबाना की छोटी बेटी (16 साल) को भी तैयार करना। मुस्कान और शबाना दोनों मिलकर उसे सिखा रही हैं। जल्दी ही तीन रंडियाँ एक साथ बिस्तर पर होंगी। 😈

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